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जीवनदीप समिति में गड़बड़ी! आय से ज्यादा खर्च, सिफारिशी नियुक्तियों से अस्पताल व्यवस्था पर संकट

जीवनदीप समिति में गड़बड़ी! आय से ज्यादा खर्च, सिफारिशी नियुक्तियों से अस्पताल व्यवस्था पर संकट

चांपा और जांजगीर अस्पतालों में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, मरीजों की सुविधाएं प्रभावित

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जांजगीर-चांपा।जिले के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गठित जीवनदीप समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चांपा और जांजगीर के अस्पतालों में समिति की आय से अधिक खर्च होने और अनावश्यक नियुक्तियों के आरोप सामने आए हैं, जिससे अस्पतालों की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।

जानकारी के अनुसार, स्वर्गीय बिसाहूदास महंत स्मृति शासकीय चिकित्सालय, चांपा में जीवनदीप समिति की वार्षिक आय लगभग 8.5 लाख रुपये है, जबकि कर्मचारियों के वेतन पर ही करीब 9 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस स्थिति में समिति पहले से ही घाटे में चल रही है, जिससे अन्य आवश्यक सेवाओं पर खर्च करना मुश्किल हो रहा है।

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आरोप है कि समिति के माध्यम से जरूरत से अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। इनमें से कई नियुक्तियां जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सिफारिश पर की गई बताई जा रही हैं। इसका सीधा असर अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं पर पड़ रहा है।

इसी तरह जिला चिकित्सालय जांजगीर में भी कंप्यूटर ऑपरेटर और कार्यालयीन स्टाफ के नाम पर अनावश्यक नियुक्तियों की शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि काम की तुलना में स्टाफ अधिक है, जिससे समिति पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

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जीवनदीप समिति का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों में अतिरिक्त संसाधनों के माध्यम से मरीजों को बेहतर सुविधाएं देना है, लेकिन मौजूदा हालात इसके विपरीत दिखाई दे रहे हैं। संसाधनों का उपयोग मरीजों की सुविधाओं के बजाय वेतन और गैर-जरूरी खर्चों में हो रहा है।

मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों ने समिति की आय-व्यय का पारदर्शी ऑडिट कराने और नियुक्तियों की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जरूरत के अनुसार ही कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।

अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या कोई ठोस कार्रवाई सामने आती है या नहीं।

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